Thursday, October 14, 2010

एक गुब्‍बारा मेरा था


एक बच्‍चा
रोज घूमता नानू के साथ
रोज जाकर मेला देखता .
एक दिन उसने बैलून लिया
जो ऊपर उड जाता था
जब वह बच्‍चा यानी मैं, घर आया
और बैलून को ऊपर उडाया
वो छत पर जाकर चिपक गया
नानू ने उसे नीचे उतारा
फिर में रात में सो गया.
सुबह में जब मैं उठा
तो देखा कि बैलून नीचे पडा है
हवा उसकी सब निकल गई थी
बैलून हो गया था छोटा सा.

No comments:

Post a Comment