सभी लोगों को मेरी ओर से नमस्ते
मैंने बहुत दिनों से आप लोगों से बात ही नहीं की, दरअसल मैं स्कूल के होमवर्क और पढाई में ही व्यस्त हो गया था, वैसे यह बात भी सही है कि मैंने उतनी कोशिश नहीं की जितनी करनी चाहिए थी। खैर छोडिए, अब मैं फिर लौट आया हूं और इस बीच मैंने कविताएं लिखनी भी शुरू की हैं, आज अपनी कुछ कविताएं आपका पढाता हूं।
टे़न की कविता
छुक'छुक करती आई ट़ेन,
अनूपपुर पहुंच गई
वहां पर रुक गई,
वहां पर थोड़े आदमी उतरे,
वहां से वो गई कटनी।
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